एक स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है क्योंकि शरीर और मन दोनों आपस में
एक दूसरे से जुड़े हुए है अर्थात् शरीर स्वस्थ होगा तो मनुष्य का मन तथा मस्तिष्क भी स्वस्थ होगा
किन्तु क्या आप जानते है कि यदि आप किसी मानसिक रोग से ग्रस्त होंगे तो आपका शरीर
धीरे-धीरे स्वतः ही बीमार पड़ने लगेगा फिर चाहे आप शरीर को स्वस्थ रखने के लिये स्वच्छ एवं
पोष्टिक आहार लें या फिर नियमित रूप से व्यायाम करें, क्योंकि मन के रोग शरीर को थका ही देते
है। इसलिये आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को कहा जाता है कि खुल कर बात करों, अपनी सभी
बातें फिर चाहें वह अच्छी बातें हो या बुरी बातें किसी न किसी से अवश्य कहों क्योंकि जो बातें आप
किसी से कह नहीं पातें अन्त में वही सब आपके मानसिक विकारों में परिवर्तित होकर आपको
मानसिक आघात पहुंचाते है और आपको एक मनोरोगी बना देते है कहते है कि जिन बातों को हम
खा जाते है अन्त में वह हमें खा जाती है। आपको किसी भी रूप में कुछ भी अच्छा या बुरा लगा हो,
आपको उसे अवश्य किसी न किसी को कहना चाहिए और अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान
शारीरिक स्वास्थ्य से अधिक रखना चाहिए। शरीर की चोटें जो आपको दिखती है तो आप उनका
इलाज करवातें है किन्तु मन की चोटें जो किसी को दिखती नहीं है तो उस ओर कोई ध्यान भी नहीं
देता है। मानसिक शांति तथा सुकून के लिये ही आपको योग, ध्यान तथा पारंपरिक अभ्यास जैसे-
अभ्यंग (तेल मालिश), नंगे पैर चलना, त्राटक (दीपक ध्यान), प्राणायाम, सात्विक आहार, जड़ी-बूटी
उपयोग, यह सभी आपको नियमित रूप से प्रतिदिन करना चाहिए।
योग, स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, ध्यान एवं पारंपरिक अभ्यास