यह शोध पत्र ‘महिला नेतृत्व एवं समावेशी विकास‘ की अवधारणा का व्यापक विश्लेषण
प्रस्तुत करता है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में इसकी केन्द्रीय भूमिका को स्पष्ट
करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक,
राजनीतिक तथा डिजिटल क्षेत्रों में बढती भागीदारी किस प्रकार समावेशी विकास को सशक्त
बनाती है। शोध में विशेष रूप से केन्द्रीय बजट 2026-27 में प्रस्तुत महिला सशक्तिकरण नीतियों
और कार्यक्रमों का विश्लेषण किया गया है, जिनमें लखपति दीदी, ैभ्म्.ड।त्ज्ै ,ैज्म्ड शिक्षा,
महिला उद्यमिता तथा डिजिटल नेतृत्व जैसे प्रमुख आयाम शामिल हैं।
यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों जैसे- सरकारी रिपोर्ट, नीति दस्तावेज, और अंतर्राष्ट्रीय
संस्थाओं के प्रकाशनों पर आधारित है तथा गुणात्मक पद्धति के माध्यम से विषय का विश्लेषण
करता है। निष्कर्षतः यह स्पष्ट होता है कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न
नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास और राष्ट्रीय प्रगति का भी एक महत्वपूर्ण कारक है। हालांकि,
लैंगिक असमानता, शिक्षा की कमी और संसाधनों तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियाँ अभी भी
विद्यमान हैं। अतः यह आवश्यक है कि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक दृष्टिकोण
में परिवर्तन लाकर महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जाए, जिससे एक समावेशी और
सशक्त विकसित भारत का निर्माण संभव हो सके।
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