यह समीक्षा पत्र उत्तराखण्ड राज्य के माध्यमिक स्तर पर अध्ययनरत कला व विज्ञान वर्ग के
सामान्य एवं दिव्यांग छात्र-छात्राओं के आकांक्षा स्तर एवं समायोजन स्तर का तुलनात्मक अध्ययन
करता है। राज्य की कठिन भूगोलिक परिस्थितियों के बीच ‘समग्र शिक्षा अभियान‘ के क्रियान्वयन,
विशेष शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है। यह
अध्ययन मौजूदा साहित्य और सरकारी रिपोर्टों के आधार पर सुधार के सुझाव प्रस्तुत करता है।
इस लेख में चर्चा का मुख्य मुद्दा यह है कि विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के सन्दर्भ में भारतीय
सन्दर्भ में स्वतंत्रता के बाद के सरकारी दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर दिव्यांग बच्चों के
लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षिक प्रावधानों पर चर्चा की गई है।
यह लेख माध्यमिक स्तर पर अध्ययनरत कला व विज्ञान वर्ग के सामान्य एवं दिव्यांग
छात्र-छात्राओं के आकांक्षा स्तर एवं समायोजन स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करता है। विशेष
आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ ही भारतीय संविधान के सापेक्ष्य में एक समान
शिक्षा के अधिकार की बात कही है।
विशेष शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को स्कूल, परिवार और समाज में
अनुकूल समायोजित करने का प्रयास किया जाता है। ताकि वे अपनी दिन प्रतिदिन की समस्याओं
को हल करने में सक्षम हो सकें। उत्तराखण्ड में विभिन्न शोध पत्रों, सरकारी रिपोर्टों (जैसे
उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग या छब्म्त्ज् की रिपोर्टें) और अकादमिक लेखों (जैसे न्व्न् और अन्य
विश्वविद्यालयों के) को खोजना होगा जो विशेष आवश्यकता वाले बच्चो, शिक्षक प्रशिक्षण,
नीतियों और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के मुद्दों पर केंद्रित हों; इन समीक्षाओं में अक्सर
दिव्यांग बच्चों की विशेषताओं, शिक्षा के अधिकार (त्ज्म्) जैसे कानूनी ढाँचों के संदर्भ में
उत्तराखण्ड के संदर्भ में समीक्षा की जाती है, ताकि सामान्य एवं दिव्यांग छात्र-छात्राओं के
आकांक्षा स्तर एवं समायोजन स्तर के अध्ययन रोडमैप तैयार किया जा सके।
दव्यांग, माध्यमिक स्तर, आकांक्षा स्तर एवं समायोजन स्तर